1986 की शिक्षा नीति: भारतीय शिक्षा के इतिहास में मील का पत्थर

दूसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को 1986 में स्वीकृत किया गय nabha। यह नीति पहली बार 1968 में आई पहली शिक्षा नीति के बाद का एक महत्वपूर्ण कदम था। इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश में शिक्षा के समान वितरण, गुणवत्ता में सुधार और समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंच को सुनिश्चित करना था।

1986 की शिक्षा नीति ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, लड़कियों और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए शिक्षा को सुलभ बनाने पर जोर दिया। इसके तहत लोक शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया और नए स्कूल स्थापित करने की योजनाएं शुरू की गईं। साथ ही, शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यचर्या में सुधार के प्रयास भी किए गए।

इस नीति में 1992 में संशोधन किया गया, ताकि बदलती परिस्थितियों और शिक्षा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जा सके। इस संशोधन ने आवश्यकतानुसार नीति में लचीलापन लाया और निरंतर विकास के द्वार खोले।

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