महाराणा प्रताप ने चित्तौड़ क्यों छोड़ा?
महाराणा प्रताप मेवाड़ के वीर योद्धा थे, जिन्होंने मुगल साम्राज्य के खिलाफ अपने जीवन भर लड़ाई जारी रखी। लेकिन यह सोचना गलत होगा कि उन्होंने चित्तौड़ को छोड़ दिया हो। वास्तव में, 1568 में मुगल बादशाह अकबर ने चित्तौड़गढ़ पर कब्जा कर लिया था, जब महाराणा प्रताप अभी राजा नहीं बने थे।
उनके पिता महाराणा उदय सिंह ने तब शहर छोड़कर गिरिप्रदेश में शरण ली थी, क्योंकि सीधा युद्ध लड़ना असंभव था। महाराणा प्रताप ने कभी भी मुगलों के सामने झुकना पसंद नहीं किया। वह घोड़े पर सवार, जंगलों और पहाड़ियों में छिपकर लड़ते रहे।
महाराणा प्रताप ने मेवाड़ के कई किलों पर वापस कब्जा किया, लेकिन चित्तौड़ अकबर के अधीन ही रहा। वह चाहते थे कि चित्तौड़ वापस मिले, लेकिन उनके जीवनकाल में यह संभव नहीं हो सका।
इसलिए, महाराणा प्रताप ने चित्तौड़ नहीं छोड़ा—वह उनके हाथ से छीन लिया गया था। लेकिन उनकी वीरता, स
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