पृथ्वी: माँ भी और शत्रु भी?

पृथ्वी को हम सभी की माँ कहा जाता है। वह हमें खाना, पानी, ऑक्सीजन और रहने की जगह देती है। लेकिन कभी-कभी इसी पृथ्वी को शत्रु भी कहा जाता है। ऐसा क्यों? दरअसल, पृथ्वी की प्रकृति में कभी-कभी इतनी ताकत आ जाती है कि वह तबाही मचा देती है।

भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ पृथ्वी के अंदर होने वाली गतिविधियों से उत्पन्न होती हैं। ये आपदाएँ मनुष्य, जानवर और प्रकृति के लिए बहुत घातक हो सकती हैं। ऐसे में, जब पृथ्वी जीवन को समाप्त कर देती है, तो उसे शत्रु कहा जाना स्वाभाविक लगता है।

लेकिन सच यह है कि पृथ्वी न तो माँ है और न ही शत्रु। वह निष्पक्ष है। वह अपने नियमों के अनुसार चलती है। वह किसी के लिए नहीं, न किसी के खिलाफ। उसकी ताकतें मानव नियंत्रण से बाहर हैं। जब वह अपने आंतरिक दबाव को कम करती है, तो कभी भूकंप आ जाता है। यह उसका संतुलन बनाए रखने का तरीका है।

इसलिए, प

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