शिव: ब्रह्मांड के सर्वोच्च सत्य

कई बार मन में सवाल उठता है कि पूरी पृथ्वी और ब्रह्मांड के स्वामी आखिर कौन हैं? जब हम धर्म और अध्यात्म की बात करते हैं, तो शिव का नाम सबसे पहले आता है। क्योंकि शिव केवल एक देवता नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं ब्रह्मांड हैं। वे न तो केवल आरंभ हैं, बल्कि अंत भी।

शिव वह शक्ति हैं जो सबमें समाई हुई है। जिस ओमकार की ध्वनि से इस जगत की उत्पत्ति हुई, उस ओम का अर्थ भी शिव ही है। वे महाकाल हैं — जिनके आगे समय भी नतमस्तक हो जाता ह । इसलिए उन्हें देवों के देव, महादेव कहा जाता है।

शिव केवल तब नहीं रहते जब उनकी पूजा होती है, बल्कि वे तो तब भी हैं जब जगत सो रहा होता है। वे कर्म के भी साक्षी हैं और मोक्ष के मार्गदर्शक भी। उनके बिना न तो कोई कर्म पूरा होता है, न ही कोई अंतिम मुक्ति मिलती है।

हर श्वास में, हर धड़कन में शिव का निवास है। वे निराकार हैं, फिर भी हर रूप में विद्यमान हैं। इसलिए जब कोई पूछे कि भगवान कौन हैं

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय