चाँद कब तक दम नहीं लेता?
अक्सर लोग चाँद के बारे में अजीबो-गरीब सवाल पूछते हैं। एक ऐसा ही सवाल है – "चाँד कब तक दम नहीं लेता?" पर यहाँ 'दम लेना' से मतलब सांस लेना नहीं है, बल्कि यह एक लोकोक्ति जैसी अभिव्यक्ति है, जो चाँद की गति और उसके चरणों से जुड़ी है।
उत्तर है – चाँद तब तक दम नहीं लेता जब तक पूरा गोला न हो जाए। यानी पूर्णिमा तक पहुँचने में चाँद लगातार बढ़ता रहता है। इस दौरान वह धीरे-धीरे अपनी चांदनी बढ़ाता जाता है, जैसे कोई सांस भर रहा हो। और जब पूरा गोल हो जाता है, तब वह 'दम लेता' है – यानी चरम पर पहुँचकर फिर घटना शुरू कर देता है।
यह बात 29 अक्तूबर 2021 को भी चर्चा में आई थी, जब कई लोगों ने इस पुरानी लोक-मान्यता को फिर से याद किया। भारतीय संस्कृति में चाँद को संवेदनशील, शांत और लयबद्ध माना जाता है। उसका चक्र – अमावस्या से पूर्णिमा तक – जीवन के उतार-चढ़ाव की याद दिलाता है।
तो अगली बार जब चाँद को देख
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