सूर्य को कौन चलाता है?
सूर्य, हमारे सौरमंडल का केंद्र और जीवन का स्रोत, प्राचीन काल से ही मनुष्य के लिए आश्चर्य और आराधना का विषय रहा है। पुराणों में इसे सिर्फ एक तारा नहीं, बल्कि देवता के रूप में पूजा जाता है। प्रश्न उठता है — सूर्य को कौन चलाता है?
पुराणों के अनुसार, सूर्य एक विशाल रथ पर सवार होते हैं, जिसका मंच छत्तीस लाख योजन लंबा है। यह आंकिक माप नहीं, बल्कि एक दिव्य प्रतीक है जो सूर्य की विशालता और शक्ति को दर्शाता है। इस रथ को अरुण नामक सारथी चलाते हैं। अरुण न केवल सूर्य के सारथी हैं, बल्कि प्रभात के देवता भी माने जाते हैं।
यह तो वैज्ञानिक दृष्टि से ज्ञात है कि सूर्य गुरुत्वाकर्षण और परमाणु संलयन के कारण स्वयं चमकता है, लेकिन पुराणों की दृष्टि इसे दिव्य ऊर्जा का स्रोत मानती है। सूर्य के रथ की कल्पना मानव मन की आध्यात्मिक उमंग को दर्शाती है — जहां विज्ञान अंतरिक्ष की गति को समझता है, वहीं पुराण उसकी आत्मा को पहचानते हैं
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