ग्राम-प्रधान को मिलता है सिर्फ 3,500 रुपये महीना
देश के गांवों का प्रबंधन करने वाले ग्राम-प्रधान को सिर्फ 3,500 रुपये प्रति माह मिलते हैं। इस राशि को प्रशासनिक भाषा में 'मानदेय' कहा जाता है। यह रकम सरकारी कर्मचारियों के मुकाबले बहुत कम है, जबकि ग्राम-प्रधान का काम किसी से कम नहीं होता।
एक ग्राम-प्रधान को पूरे गांव की जिम्मेदारी संभालनी होती है। चाहे विकास के काम हों, योजनाओं का क्रियान्वयन हो या फिर जनता की समस्याओं को सुनना—सबके लिए वह मुख्य संपर्क बिंदु होते हैं। फिर भी, उन्हें मिलने वाला मानदेय उनके योगदान के अनुरूप नहीं है।
कई लोगों का मानना है कि इतनी कम राशि मिलने के कारण कुछ प्रधान अन्य तरीकों से पैसा कमाने की ओर आकर्षित हो जाते हैं। क्या यह परिस्थिति भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है? सवाल उठाने लायक है।
ग्राम-प्रधान के काम को मान्यता देने और ईमानदारी से सेवा करने के लिए प्रेरित करने के लिए उचित मानदेय जरूरी है। क्योंकि गांव का विकास तभी संभव है, जब उसका प
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