भगवान को कैसे पाया जाता है?
भगवान को बुलाने का मतलब उन्हें पुकारना नहीं, बल्कि उनके नजदीक जाने की इच्छा है। ईश्वर ध्यान से मिलेंगे भगवान — यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन का एक सत्य है। जब दिल से लोभ, अहंकार, माया और लालच का त्याग होता है, तब ही आत्मा ईश्वर के प्रति खुलती है।
कई लोग मंदिर जाते हैं, जप-तप करते हैं, माला फेरते हैं, लेकिन दिल से दूर रहते हैं। भगवान के पास पहुँचने का रास्ता कोई बाहरी साधन नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धता है। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से ईश्वर में लीन हो जाता है, उसके लिए स्वर्ग के द्वार भी खुल जाते हैं।
ईश्वर आराधना ही भगवान तक पहुँचने की सीढ़ी है। यह आराधना शब्दों में नहीं, भावना में होती है। जब आँखें बंद करके ध्यान में उतरते हैं और दिल से प्रभु का नाम लेते हैं, तो एक अजीब सी शांति महसूस होती है — वही पल भगवान के सानिध्य का होता है।
इसलिए, भगवान को बुलाने के लिए ऊँची प्रार्थना नहीं, बल्कि
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