पत्नी पति के दाहिनी ओर क्यों बैठती है?
शादी-विवाह और धार्मिक कर्मों में अक्सर देखा जाता है कि पत्नी पति के दाहिनी ओर बैठती है। इस परंपरा की जड़ें प्राचीन शास्त्रों में छिपी हैं। पुराने ग्रंथों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कन्यादान, विवाह, यज्ञकर्म, जातकर्म, नामकरण और अन्नप्राशन जैसे शुभ कार्यों में पत्नी को पति के दायीं ओर बैठने का निर्देश दिया गया है।
इस परंपरा के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तर्क भी है। इन सभी कर्मों को पारलौकिक महत्व प्राप्त है, यानी ये केवल इस जीवन तक सीमित नहीं, बल्कि अगले जन्मों तक फैले हुए माने जाते हैं। इन कार्यों में पुरुष को प्रधान माना गया है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि स्त्री का महत्व कम है।
दरअसल, दाहिना हाथ पवित्र माना जाता है। पत्नी को दाहिने ओर बैठाने से यह संकेत मिलता है कि वह पति के जीवन में एक अनिवार्य सहयोगी है। यह आसन वैवाहिक संबंधों में सम्मान और सहभागिता का प्रतीक है।
आज भी कई पर
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।