प्यार क्यों कभी-कभी बेतुका लगता है?

क्या आपने कभी महसूस किया है कि प्यार करना कभी-कभी बिलकुल भी समझ से बाहर लगता है? प्यार का हमेशा कोई तर्क या मतलब नहीं होता — और यही इसकी सबसे बड़ी सच्चाई भी हो सकती है। कई बार हम अपने जीवन के सबसे बड़े फैसले प्यार के कारण लेते हैं, भले ही वे तर्क के खिलाफ क्यों न हों।

हम उस शख्स की खामियों को नजरअंदाज कर देते हैं जिससे हम प्यार करते हैं। कभी-कभी तो हम खुद की जरूरतों से भी ऊपर उसकी भावनाओं को रख देते हैं। प्यार में आकर हम खुद को अजेय महसूस करते हैं, जैसे कुछ भी नामुमकिन नहीं। लेकिन जब वही प्यार खत्म होता है, तो लगता है जैसे जिंदगी का आधार ही टूट गया हो।

यह भावनात्मक उथल-पुथल इसलिए होती है क्योंकि प्यार सिर्फ दिमाग का नहीं, दिल का भी मामला है। यह हमें जोखिम उठाने को प्रेरित करता है, भले ही वह सही न हो। यही कारण है कि कई बार प्यार समझ से परे लगता है — क्योंकि यह दिल की भाषा बोलता है, तर्क की नहीं।

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