कब्र पर जाकर क्या पढ़ना चाहिए?

कब्रिस्तान जाना हर मुसलमान के लिए एक सुन्नत और सबक भरा काम है। जब आप किसी प्यारे की कब्र पर फातिहा पढ़ने जाएं, तो सबसे पहले अच्छी तरह वुजू कर लें। साफ-सुथरे कपड़े पहनकर कब्रिस्तान पहुँचें।

कब्रिस्तान में प्रवेश करते ही आपको आखिरत की याद आनी चाहिए। सबसे पहले सामान्य सलाम करें – “अस्सलामु अलैकुम या अहल द-दारिल ईमान, अस्सलामु अलैकुम या अहल द-दारिल फिदार, गुफरानक मिन अल्लाह व रहमतुहू”। यह सलाम सभी मुसलमानों के लिए है।

अब अपने जन्नती परिजनों की कब्र के पास जाएं। उनकी आत्मा के लिए दुआ करें। फातिहा की पहली सूरह “अल-फातिहा” पढ़ें और फिर इसे उनकी तरफ भेज दें। कई लोग यहाँ दरूद शरीफ भी पढ़ते हैं।

कुछ लोग कब्र पर बैठकर कुरान की आयतें पढ़ते हैं या दुआएं मांगते हैं। यह सब अच्छा है, बस नियमों का ध्यान रखें। कब्र पर कोई बेहद रोना-धोना न करें, न ही चीख-पुकार करें।

कब्रिस्तान आखिरत का सबक देता है।

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