दक्षिणा काली: महाकाल की प्रियतमा

दक्षिणा काली हिन्दू तांत्रिक परंपरा की दस महाविद्याओं में से एक मानी जाती हैं। मान्यता है कि वे महाकाल की अत्यंत प्रिय शक्ति हैं और समय, विनाश व परिवर्तन की देवी काली के ही विशिष्ट रूप हैं। कहा जाता है कि काली माँ ने अपने दक्षिण तथा वाम रूप में प्रकट होकर दस महाविद्याओं के रूप में ब्रह्मांड के विभिन्न पहलुओं को प्रकट किया।

बृहन्नीलतंत्र के अनुसार, काली रक्त और कृष्ण (काले) दो भावों में विभाजित हैं। इन्हीं में से एक रूप दक्षिणा काली का है, जो दक्षिण मार्ग की ओर संकेत करती हैं। यह रूप संतुलन, ज्ञान और सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जबकि उनकी अन्य देवी रूप अधिक तांडवीय या विनाशकारी शक्ति दर्शाते हैं।

दक्षिणा काली की उपासना आध्यात्मिक जागृति, भय पर विजय और आंतरिक शक्ति प्राप्ति के लिए की जाती है। उन्हें भक्तों की सुरक्षा करने और अज्ञानता के अंधकार को दूर करने वाली माना जाता है। इनकी पूजा विश

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