सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता: विश्वास का अनूठा उदाहरण
सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता भक्ति और निस्वार्थ प्रेम की अनूठी मिसाल है। जब श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बने, तब भी उनकी बाल्यकाल की मित्रता सुदामा के साथ बनी रही। सुदामा की पत्नी सुशीला, जो बहुत सरल और विनम्र थीं, एक दिन उनसे बोलीं कि अगर आप श्रीकृष्ण के मित्र हैं, तो उनसे मिलने जाइए।
गरीबी में जी रहे सुदामा के पास सौगन ले जाने के लिए भी कुछ नहीं था। तब सुशीला ने पड़ोस से चावल मांगकर लाईं। सुदामा वह चावल लेकर द्वारिका पहुंचे। श्रीकृष्ण ने उनका स्नेह से स्वागत किया। उन्होंने सुदामा से चावल लिए, लेकिन उन्हें खाने नहीं दिया। बल्कि, दो मुठ्ठी चावल खाने के बाद भी सुदामा के घर धन-धान्य, सुख-समृद्धि लौट आई।
यह कहानी केवल एक चमत्कार नहीं, बल्कि विश्वास और निष्ठा की गहराई को दिखाती है। कृष्ण ने सुदामा को सांसारिक वस्तुएं नहीं दीं, बल्कि उनके विश्वास के बल पर उनका सब कु
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