वृंदावन की यमुना और कृष्ण की लीला

वृंदावन की यमु衄ा तो केवल एक नदी नहीं, यहाँ तो वो महारानी मानी जाती हैं—श्रीकृष्ण की पटरानी। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है। कहा जाता है कि यमुना के तट पर स्नान करते समय गोपियाँ बिना वस्त्र के जल में उतर गई थीं। तभी भगवान कृष्ण ने उनके वस्त्र ले लिए। इसी घटना को 'चीरहरण लीला' कहा जाता है।

यह लीला केवल मज़ाक या खेल नहीं थी, बल्कि एक गहरा संदेश था। कृष्ण ने इसके ज़रिए समाज को नैतिकता, संयम और आदर का पाठ पढ़ाया। बिना वस्त्रों के स्नान करना, खासकर स्त्रियों के लिए, उस समय भी निषेध माना जाता था। और कृष्ण ने उस मूल्य को सुरक्षित रखने के लिए यह लीला रची।

आज भी वृंदावन के घाटों पर यह कथा जीवित है। भक्त यमुना के जल में डुबकी लगाते हुए कृष्ण की उस मधुर लीला को याद करते हैं। यह नदी सिर्फ पानी नहीं, आस्था की धारा है—जहाँ हर तरंग में कृष्ण का स्पर्श महसूस होता है।

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