राधा और कृष्ण: एक अधूरी मोहब्बत की कहानी

जब कृष्ण वृंदावन छोड़कर मथुरा चले गए, तो राधा के जीवन का एक नया दौर शुरू हुआ। भले ही दोनों के प्रेम की कहानी अमर है, लेकिन उसके बाद राधा के जीवन का जो सफर रहा, वो कम दर्दनाक नहीं था।

कहा जाता है कि राधा की शादी एक यादव वंशज से हो गई। वह एक सामान्य स्त्री की तरह अपने दायित्वों का निर्वहन करती रहीं। घर, पति, सास-ससुर, सभी के प्रति उन्होंने अपना फर्ज निभाया। लेकिन उनका मन? वो तो हमेशा कृष्ण में लगा रहा। चाहे वो उम्र के साथ बूढ़ी हो गईं, लेकिन उनके हृदय में कृष्ण के प्रति भावनाएं जवान रहीं।

राधा का प्रेम कभी शारीरिक नहीं, आध्यात्मिक था। वो कृष्ण के साथ नाचने-गाने तक सीमित नहीं था, वो तो आत्मा की गहराई तक उतर जाने वाला प्यार था। उनका जीवन साबित करता है कि प्रेम कभी समाप्त नहीं होता — वो बदल जाता है, धीमा पड़ जाता है, लेकिन बुझता नहीं।

आज भी राधा के नाम पर भजन गूंजते हैं, कव

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