कृष्ण और शाल्व का युद्ध: माया का अंत

कृष्ण के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब उनके सामने एक भयंकर चुनौती थी। शाल्व नाम के एक राजा ने द्वारका पर आक्रमण किया और कृष्ण के पिता वसुदेव को कैद कर लिया, ऐसा एक अपरिचित व्यक्ति ने बताया। कृष्ण इस बात से गहराई से आहत हुए। क्षण भर के लिए उनके मन में चिंता और दुख की छाया छा गई।

लेकिन कृष्ण केवल एक महान योद्धा नहीं, बल्कि एक दूरदृष्टि वाले व्यक्ति भी थे। कुछ ही पलों बाद, जब वे आकाश में एक विमान पर शाल्व और वसुदेव को साथ देखते हैं, तो उन्हें सच्चाई का एहसास होता है। यह सब वास्तविक नहीं था — यह केवल माया थी। शाल्व ने अपनी चतुराई से एक भ्रम पैदा कर दिया था, ताकि कृष्ण को भ्रमित किया जा सके।

लेकिन कृष्ण माया के जाल में नहीं फंसे। उन्होंने तुरंत सुदर्शन चक्र उठाया और शाल्व पर निशाना साधा। एक तेज प्रकाश के साथ चक्र आगे बढ़ा और शाल्व का अंत हो गया।

यह कहानी सिर्फ एक युद्ध की घटना नहीं है, बल

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