राधे राधे दो बार क्यों कहते हैं?

राधे राधे कहने के पीछे एक सुंदर लीला छिपी हुई है। जब कृष्ण ब्रज छोड़कर मथुरा जाते हैं, तो राधा का विरह इतना तीव्र हो जाता है कि वे कृष्ण के रूप में विचरण करने लगती है在玩家中। कहते हैं, कृष्ण ने जाते-जाते अपनी प्रिय बांसुरी राधा को दे दी थी, और राधा मोरपंख धारण कर, पीतांबर पहनकर, कृष्ण के स्वरूप में ब्रज में घूमने लगीं।

बृजवासी उन्हें देखकर समझ जाते थे कि यह राधा हैं, जो अपने प्रियतम कृष्ण के रूप में प्रकट हुई हैं। वे उन्हें देखकर प्रेम से चिल्लाते—हे राधे! हे राधे!—क्योंकि उनके भीतर अब केवल कृष्ण नहीं, बल्कि राधा का भाव भी समाया हुआ था।

इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी कृष्ण भक्त राधे राधे कहकर राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम का स्मरण करते हैं। यह नामाभिधान न सिर्फ भक्ति की गहराई दिखाता है, बल्कि प्रेम के उस अनूठे रिश्ते की याद दिलाता है, जहां राधा और कृष्ण एक दूसरे में घुल गए।

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