कृष्ण के वृंदावन काल की मासूमियत
भगवान श्रीकृष्ण का बचपन वृंदावन में बीता, जहाँ उन्होंने लगभग 14 से 16 वर्ष तक समय बिताया। यह उम्र उनके जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण दौर था, जब वे गोप-गोपिकाओं के बीच लीलाएँ करते थे, माखन चुराते थे और बंसी की मधुर धुन पर गोपियों को मंत्रमुग्ध करते थे। यह वही समय था जब उन्होंने कंस के डर से छिपाकर पले बढ़े।
इसी अवधि के बाद, जब वे लगभग 16 साल के हुए, तो उन्होंने मथुरा में अपने मामा कंस का वध कर दिया। कंस ने उनके जन्म से पहले ही उनकी माँ देवकी और पिता वसुदेव को जेल में डाल रखा था। कृष्ण के द्वारा कंस का वध न सिर्फ एक राजनीतिक कार्य था, बल्कि उनके माता-पिता को आजाद कराने का भी साधन था।
कृष्ण का वृंदावन में बिताया बचपन उनके चरित्र को प्रेम, लीला और निष्काम भक्ति का प्रतीक बनाता है। वहाँ के हर एक पल ने भारतीय संस्कृति में एक अमिट छाप छोड़ी।
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