कृष्ण के वृंदावन छोड़ने के बाद राधा का क्या हुआ?
जब कंस ने कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलाने के लिए अक्रूर को भेजा, तो वृंदावन में एक अजीब सन्नाटा छा गया। कृष्ण के जाने की खबर जैसे जंगल की आग की तरह फैली, वैसे ही सभी गोपियों के हृदय में विछोड़ का दर्द उमड़ पड़ा। लेकिन सबसे अधिक पीड़ा राधा के मन में थी।
राधा के लिए कृष्ण सिर्फ एक मित्र या देवता नहीं, बल्कि उनके जीवन का अर्थ थे। जब वे वृंदावन छोड़कर चले गए, तो राधा के लिए वह धरती भी सूनी हो गई। कहा जाता है कि राधा ने कभी भी कृष्ण से फिर मिलने की आशा नहीं छोड़ी, लेकिन वे जानती थीं कि उनका संबंध अब भौतिक दुनिया के पार हो चुका था।
कुछ परंपराओं के अनुसार, राधा ने कृष्ण के जाने के बाद भक्ति में ही अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे वृंदावन में ही रहीं, और उनकी स्मृतियों के सहारे जीती रहीं। उनका प्रेम कृष्ण के प्रति इतना शुद्ध था कि वह कभी नहीं मरा — आज भी वृंदावन की हवा में राधा-कृष्ण
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