कार में कूलेंट क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
कार के इंजन को ठंडा रखने के लिए कूलेंट या शीतलक का उपयोग किया जाता है। यह आमतौर पर पानी और एंटीफ्रीज (एथिलीन ग्लाइकॉल या प्रोपिलीन ग्लाइकॉल) का मिश्रण होता है। कई लोग सोचते हैं कि कूलेंट सिर्फ पानी है, लेकिन ऐसा नहीं है। सिर्फ पानी इंजन को जंग से बचा नहीं सकता, जबकि कूलेंट गलनांक कम करके गर्मी में भी प्रभावी रहता है।
कई बार, कार के रेडिएटर में गंदगी या जमाव बन जाता है, जिससे ठंडक कम हो जाती है। इसलिए रेडिएटर फ्लश की जरूरत पड़ती है। इसे कूलेंट फ्लश भी कहते हैं। यह एक केमिकल मिश्रण होता है जो रेडिएटर के अंदर के गंदे जमाव को साफ कर देता है।
अगर आप लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, तो कार के कूलिंग सिस्टम की नियमित जांच बेहद जरूरी है। ओवरहीटिंग से इंजन को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, हर 20,000 से 30,000 किलोमीटर के बाद कूलेंट बदलने या फ्लश कराने की सलाह दी जाती है।
अच्छी तरह से
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