कृष्ण जी का जन्म: एक दिव्य प्रेम की कहानी
कृष्ण जी, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, वसुदेव और देवकी के पुत्र थे। उनका जन्म कंस के काले जमाने में हुआ, जब भय और अत्याचार का बोलबाला था। देवकी कंस की बहन थीं, लेकिन कंस को भविष्यवाणी हुई थी कि उनकी बहन का आठवां पुत्र उनका वध करेगा। इसी डर के कारण उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनके पहले सात बच्चों को मार डाला।
लेकिन भगवान की लीला किसी मनुष्य के नियमों में बंधती नहीं। आठवें बच्चे के रूप में कृष्ण का जन्म शाम के समय मथुरा के जेल में हुआ। उसी रात, वसुदेव ने बालक कृष्ण को अपने सिर पर रखा और भयंकर आंधी में गोकुल की ओर चल पड़े। यमुना नदी बह रही थी, लेकिन कृष्ण की कृपा से वसुदेव के कदमों ने पानी को छुआ तक नहीं।
इस तरह, एक भयंकर शासक के खिलाफ एक नन्हे बालक ने अपने जन्म से ही धर्म और प्रेम की नींव रख दी। कृष्ण न सिर्फ एक दैवीय पुत्र थे, बल्कि मानवता के लिए आशा, साहस और
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