श्रीकृष्ण के बाद यदुवंश का अंत

श्रीकृष्ण के तिरोहार के बाद यदुवंश पर एक गहरा संकट छा गया। उनके जाने के बाद न केवल द्वारिका में शोक का माहौल था, बल्कि एक पूरे वंश की शक्ति और महिमा भी अंत की ओर बढ़ गई। श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी और अन्य पत्नियों में से एक जांबवती ने भी उनके जाने के बाद देह त्याग कर दिया। इसी तरह, श्रीकृष्ण के भाई बलराम की पत्नी रेवती ने भी सती का मार्ग अपनाया।

श्रीकृष्ण और बलराम के जाने के साथ ही यदुवंश का अस्तित्व लुप्त हो गया। इस वंश की शक्ति, वैभव और दिव्यता समाप्त हो गई। अर्जुन, जो उनके घनिष्ठ थे, दुखी मन से द्वारिका आए और बचे हुए परिवार के सदस्यों को लेकर इंद्रप्रस्थ की ओर लौट पड़े।

लेकिन जैसे ही अर्जुन द्वारिका से वापस लौटे, समुद्र ने उस दिव्य नगरी को अपने भीतर समा लिया। द्वारिका का डूबना केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक युग के अंत का प्रतीक था। जिस शहर ने श्रीकृष्ण की महिमा

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