श्री कृष्ण की बांसुरी का अद्भुत आकर्षण
श्री कृष्ण की बांसुरी सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम की प्रतिमा थी। कहते हैं, उनकी बांसुरी की मधुर धुन सुनकर न केवल गोपियां और ग्वाले, बल्कि वन के पेड़-पौधे, पशु-पक्षी भी मुग्ध हो जाते थे।
एक अद्भुत बात यह थी कि जैसे ही कृष्ण बांसुरी बजाते, गायें भी उनके पीछे-पीछे चलने लगती थीं। वे अपनी चराई भूल जातीं, जैसे किसी जादू में बंध गई हों। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उनकी बांसुरी का प्रभाव मनुष्यों पर क्या होता होगा। गोपियों के हृदय तो बचपन से ही उनके प्रेम में डूबे थे, और वह धुन उस प्रेम की चिंगारी को आग बना देती थी।
यह बांसुरी कहां से आई, इसका वैसे तो कोई ठोस इतिहास नहीं मिलता, लेकिन मान्यता है कि यह कृष्ण के दिव्य स्वरूप का हिस्सा थी। शायद इसलिए आज भी बांसुरी की धुन सुनकर लोगों के मन में एक अजीब शांति और आकर्षण जाग उठता है।
कृष्ण की बांसुरी सिर्फ ध्वनि नहीं,
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