अफ्रीका में भारतीयों का प्रवास: एक दर्द भरा इतिहास
19वीं शताब्दी के दौरान लाखों भारतीय अफ्रीका पहुँचे, लेकिन यह सफर कभी खुशी का नहीं, बल्कि ज़बरदस्ती का था। ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने गांवों में गहरे कर्ज़ में डूबे किसानों और गरीब लोगों को एक नए सिस्टम के तहत अफ्रीका भेजना शुरू किया। इसे कहते हैं “बंधुआ मजदूरी”।
कर्ज़ के बंधन में फंसे हजारों भारतीयों को झांसे में लिया गया कि वे अफ्रीका में अच्छी ज़िंदगी बनाएंगे। लेकिन हकीकत कुछ और थी। अधिकांश को मैडागास्कर, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका और ईस्ट अफ्रीका के चीनी के बागानों में काम करना पड़ा। यहाँ वे भारी मेहनत करते, लेकिन आज़ादी नहीं होती थी।
इतिहास कहता है कि इस तरह 3.5 मिलियन से ज़्यादा भारतीयों को अफ्रीका ले जाया गया। उनके पसीने से यूरोपीय व्यापारिक साम्राज्य की नींव मजबूत हुई। आज भी अफ्रीका के कई हिस्सों में भारतीय समुदाय की मौजूदगी इसी दर्द भरे अध्याय की गवाही देती
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