भारत: सोने की चिड़िया क्यों कहलाता था?
भारत को एक समय पर सोने की चिड़िया कहा जाता था। यह नाम केवल काव्यात्मक नहीं, बल्कि उस सच्चाई का प्रतिबिंब है जो उस समय के भारत की ऐश्वर्यमयी तस्वीर पेश करती है। प्राचीन और मध्यकालीन भारत न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध था, बल्कि आर्थिक रूप से भी दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिना जाता था।
1600 ईस्वी के आसपास, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 1305 अमेरिकी डॉलर थी। यह आंकड़ा उस समय के अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और जापान जैसे देशों से भी आगे था। कपास, मसाले, रेशम और जौहरी का काम – ये सब भारत की वैश्विक मांग के प्रमुख कारण थे। इस धन-संपदा की वजह से यहां के बाजार विदेशी व्यापारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे।
लेकिन यही समृद्धि एक त्रासदी का भी कारण बनी। भारत के खजाने की ख्याति यूरोपीय शक्तियों को आकर्षित करने लगी। अंग्रेजों सहित कई आक्रांताओं ने इस उपनिवेश को अपनाने की कोशिश की। सोने की
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