भारतीय सेना में रैंक्स: एक नजर में

भारतीय सेना में अनुशासन और संगठन के लिए रैंक प्रणाली बहुत महत्वपूर्ण है। इस प्रणाली में सैनिकों को उनके अनुभव, जिम्मेदारी और कार्यकाल के आधार पर विभिन्न स्तरों पर रखा जाता है।

सबसे कम रैंक निजी (Private) होती है, जो एक नए जवान की शुरुआत होती है। इसके बाद निजी द्वितीय श्रेणी, निजी प्रथम श्रेणी, फिर विशेषज्ञ (Specialist) आता है। फिर नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स (एनसीओ) की श्रेणी शुरू होती है, जिसमें कॉर्पोरल से लेकर सार्जेंट तक के पद आते हैं।

उच्च स्तर पर पहुंचते हुए, स्टाफ सार्जेंट, सार्जेंट प्रथम श्रेणी, मास्टर सार्जेंट और फिर प्रथम सार्जेंट का स्थान आता है, जो एक बटालियन स्तर पर जवानों के लिए मार्गदर्शक होता है। इसके बाद सार्जेंट मेजर, कमांड सार्जेंट मेजर और सबसे ऊपर सेना के सार्जेंट मेजर की रैंक आती है, जो सेना के सभी जवानों की आवाज बनते हैं।

ये कुल 13 रैंक सेना की रीढ़ माने जाने वाले जवानों के करियर के सोपान हैं। ह

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