हनुमानजी: बंदर या ब्राह्मण?

कई लोग यह सोचते हैं कि हनुमानजी बंदर थे, लेकिन ऐसा नहीं है। यह एक भ्रामक धारणा है जो उनकी आकृति को लेकर फैली है। हनुमानजी कोई साधारण बंदर कभी नहीं थे। वे वानर जाति के राजकुमार थे, लेकिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से वे एक ब्राह्मण, वेदज्ञ और ब्रह्मचारी थे।

उनका जन्म वायु देव के आशीर्वाद से हुआ था और उनकी शिक्षा गुरु संत जाम्बवान तथा महर्षि विश्वामित्र से हुई थी। वे संस्कृत के महान पंडित थे, रामायण के प्रत्येक अध्याय को गहराई से समझते थे, और भगवान राम के अटूट भक्त थे।

हनुमानजी की वानर आकृति उनके दिव्य स्वरूप का प्रतीक है, न कि जीव जाति का। उनके रूप में छिपा संदेश यह है कि भक्ति, ज्ञान और बल का साक्षात्कार कोई भी रूप धारण कर सकता है।

हनुमान चालीसा और रामायण में उनकी ज्ञान-भक्ति-वैराग्य की अनेक गाथाएँ हैं। वे समर्पण और दुर्गम कार्यों के कर्ता के रूप में जाने जाते हैं। इसलिए,

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