मौर्य काल में 'सीता' का अर्थ क्या था?
मौर्य काल में 'सीता' शब्द का उपयोग कर (टैक्स) के लिए किया जाता था। यह कोई नाम या व्यक्ति नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजस्व व्यवस्था थी जो सीधे राज्य की आर्थिक नींव पर आधारित थी। सीता भूमि पर लगने वाला कर था जो किसानों द्वारा उगाई गई फसल का लगभग 1/6 यानी 16.6% था, हालांकि कुछ स्रोतों में इसे 10% भी बताया गया है।
यह कर राज्य की उपजाऊ भूमि पर लगाया जाता था और राज्य की प्रमुख आय का स्रोत था। मौर्य साम्राज्य में केंद्रीकृत प्रशासन था, और चन्द्रगुप्त मौर्य तथा उनके मंत्री चाणक्य ने राजस्व व्यवस्था को बेहद वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया।
मौर्य काल के दौरान भूमि का राज्य स्वामित्व माना जाता था, इसलिए उस पर उगने वाली फसल से राज्य को हिस्सा मांगना स्वाभाविक था। इसी हिस्से को सीता कहा जाता था। इसके अलावा, वह समय ऐसा था जब कृषि मुख्य आजीविका थी और राज्य अपनी सेना, प्रशासन और निर्माण कार
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