भारत की पहली महिला शिक्षिका: सावित्रीबाई फुले

लेडी टीचर इंडिया के नाम से अक्सर सावित्रीबाई फुले को याद किया जाता है। वे केवल एक शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि समाज के कुछ ऐसे बदलाव की नायिका थीं, जिनकी गूंज आज भी सुनाई देती है। 1848 में, तब जब लड़कियों को पढ़ना लगभग पाप माना जाता था, सावित्रीबाई ने देश की पहली महिला शिक्षिका के रूप में इतिहास रचा।

उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। यह कोई आसान काम नहीं था। समाज ने उनका विरोध किया, रास्ते में लोग उन पर कीचड़ फेंकते थे। लेकिन वे डटी रहीं। उनका मानना था कि शिक्षा वह हथियार है जो अंधविश्वास, जाति भेद और महिलाओं के शोषण को तोड़ सकती है।

सावित्रीबाई ने न सिर्फ लड़कियों को पढ़ाया, बल्कि निम्न जाति के बच्चों और विधवाओं जैसे उपेक्षित समुदायों के लिए भी दरवाजे खोले। आज, जब हम महिलाओं की शिक्षा को स्वाभाविक समझते हैं, तो इस बात को नहीं भ

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