पीरियड के कपड़े जलाने या दफनाने की परंपरा: मान्यता या डर?

भारत में कई स्थानों पर अब भी पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल हुए कपड़ों को जलाने या दफनाने की परंपरा देखी जाती है। यह मान्यता आज भी जिंदा है कि ऐसे कपड़े नकारात्म ऊर्जा या 'बुरी आत्माओं' को आकर्षित करते हैं, इसलिए इन्हें सामान्य कचरे के साथ फेंकना अशुद्ध या खतरनाक माना जाता है।

इस विश्वास की जड़ें सामाजिक डर और धार्मिक मान्यताओं में छिपी हैं।

लंबे समय से महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर तमाम तरह की गलतफहमियां बनी रहीं। कुछ समाजों में तो मासिक धर्म को 'अशुद्धता' माना जाता है, जिसकी वजह से ऐसे कपड़े छिपाकर या विशेष तरीके से नष्ट किए जाते हैं। लेकिन आज के दौर में, जहां सैनिटरी नैपकिन और पैड्स आम हो चुके हैं, यह प्रथा धीरे-धीरे बदल रही है।

फिर भी, कई ग्रामीण इलाकों में यह रिवाज जारी है। ऐसे में जरूरी है कि लोगों को शिक्षित किया जाए कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, न कि कोई अश

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