ट्यूब लाइट के अंदर क्या होता है?
क्या आपने कभी सोचा है कि ट्यूब लाइट कैसे काम करती है? यह सिर्फ एक साधारण बल्ब नहीं है। इसके अंदर एक खास रासायनिक जादू छिपा है।
एक ट्यूब लाइट के भीतर कांच की नली होती है जो आर्गन गैस और पारा वाष्प के मिश्रण से भरी होती है। नली के दोनों सिरों पर धातु के इलेक्ट्रोड लगे होते हैं। ये इलेक्ट्रोड एक खास प्रकार के ऑक्साइड से लेपित होते हैं, जो बिजली आने पर आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ देते हैं।
जब आप स्विच ऑन करते हैं, तो बिजली इलेक्ट्रोड्स के बीच गैस के माध्यम से गुजरती है। इससे गैस आयनित हो जाती है और पराबैंगनी (UV) किरणें निकालती है।ये पराबैंगनी किरणें हमें नहीं दिखतीं, लेकिन ट्यूब के अंदर लगा फॉस्फोर कोटिंग इन्हें दृश्य प्रकाश में बदल देता है। इसीलिए हमें रोशनी दिखाई देती है।
इस प्रक्रिया में पारा बहुत अहम भूमिका निभाता है। बिना पारे के, ट्यूब लाइट सही तरह से काम नहीं करेगी। हालांकि, पारा विष
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