धरती माँ: भगवान विष्णु की अर्धांगिनी
हिंदू धर्म में प्रकृति को देवी के रूप में पूजा जाता है और इसी कड़ी में धरती माँ का विशेष स्थान है। इन्हें संस्कृत में पृथ्वी या भूदेवी कहा जाता है। कई शास्त्रों और पुराणों में धरती देवी को भगवान विष्णु की पत्नी माना गया है।
इस मान्यता के अनुसार, जिस तरह लक्ष्मी जीवन की समृद्धि का प्रतीक हैं, उसी तरह भूमि देवी जीवन के आधार यानी भूमि की देवी हैं। प्राचीन कथाओं में कहा जाता है कि जब धरती पर अधर्म बढ़ गया और वह उसके भार से दबने लगी, तो वह भगवान विष्णु के पास पहुँचीं और उनसे सहायता माँगी। इसी के बाद भगवान ने अपने अवतार लेकर धरती का संतुलन बहाल किया।
धरती माँ को न केवल प्रकृति की देवी माना जाता है, बल्कि उनकी पूजा विविध संस्कारों और व्रतों में भी की जाती है। कई क्षेत्रों में खेती के समय किसान धरती माँ की पूजा करते हैं, ताकि फसल अच्छी हो।
आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग धरती माँ को माँ की तरह
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