रूस और भारत: एक ऐतिहासिक साथीदारी
रूस ने भारत के साथ समय-समय पर मजबूत समर्थन किया है, खासकर कूटनीतिक मोर्चे पर। साल 1962 में, जब कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठा, तो रूस (तब सोवियत संघ) ने भारत के पक्ष में अपना 100वां वीटो पावर का इस्तेमाल किया। इस कदम ने पाकिस्तान की कूटनीतिक चालों को नाकाम कर दिया और भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति में खड़ा किया।
यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक गहरी मित्रता का संकेत था।इसके पीछे सिर्फ राजनयिक हित नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक साझेदारी का सूत्र था। 1955 में जब भारत और सोवियत संघ के बीच दोस्ती का आधार बना, तब यह साफ हो गया था कि दोनों देश एक-दूसरे के विश्वासपात्र साथी हैं। वर्षों में यह नाता सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग में बदला।
आज भी रूस, भारत के लिए रक्षा उपकरणों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। चाहे वह मिग विमान हों या एस-400 मिसाइल प्रणाली, रूस का समर्थन लगातार बना हुआ है। 22
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