साहस की ज़िंदगी सबसे बड़ी ज़िंदगी
साहस केवल डर के बावजूद आगे बढ़ना नहीं, बल्कि वह है जब आप खुद को दूसरों की नज़र से न देखें। एक सच्ची ज़िंदगी वही है जहाँ इंसान निडर होकर अपने रास्ते पर चलता है, चाहे तमाशा देखने वालों की भीड़ कितनी भी ज़्यादा क्यों न हो।
आज के समय में हम अक्सर दूसरों के विचारों के डर से झुक जाते हैं। छोटी-छोटी बातों पर भी हम यह सोचने लगते हैं कि "लोग क्या कहेंगे?" लेकिन साहसी व्यक्ति कभी भी इस तरह की चिंता में नहीं फंसता। उसके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा खुद का अंदरूनी आवाज़ होता है, न कि बाहरी तालियाँ या नज़रें।
ऐसा इंसान जो बेखौफ़ जीता है, वही सच्ची ज़िंदगी जीता है। वह गिरता भी है, तो उठता है बिना शर्मिंदगी के। उसकी ताकत यह नहीं कि वह कभी नहीं गिरता, बल्कि यह है कि वह हर बार गिरने के बाद फिर से खड़ा होता है।
साहस की ज़िंदगी वही है जहाँ डर होता भी है, लेकिन आगे बढ़ने का जज्बा उससे भी
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