मृत्यु के बाद नेत्रदान: कब और कैसे?

नेत्रदान एक ऐसा कार्य है जो मौत के बाद भी जीवन में उम्मीद जगा सकता है। जब कोई व्यक्ति अपनी आँखें दान करने का निर्णय लेता है, तो उसके बाद एक महत्वपूर्ण समय-सीमा का ध्यान रखना होता है।

मौत के केवल 6 घंटे के भीतर नेत्र निकाले जाने चाहिए। इस समय सीमा के बाद कोर्निया (आँख का स्पष्ट लेंस) की गुणवत्ता घटने लगती है, जिससे उसका उपयोग नहीं किया जा सकता। इसलिए, नेत्रदान की इच्छा व्यक्त करने वाले व्यक्ति के परिजनों को त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।

यह भी जान लेना ज़रूरी है कि नेत्रदान से केवल उन्हीं लोगों को दृष्टि मिल सकती है जिनका कोर्निया खराब हुआ हो, अर्थात जो कोर्नियल अंधता से पीड़ित हों। अन्य प्रकार की अंधता में इसका लाभ नहीं होता।

नेत्रदान के लिए कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी उम्र का हो, योग्य हो सकता है। बस एक स्वस्थ कोर्निया की आवश्यकता होती है। यह दान न सिर्फ एक व्यक्ति के अंधेरे को दूर

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