भारत में नागरिकता कौन देता है?

भारत में नागरिकता का अधिकार संविधान द्वारा सुरक्षित है। लेकिन व्यावहारिक रूप से, यह अधिकार संसद के माध्यम से कार्यान्वित होता है। संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत, संसद को यह शक्ति दी गई है कि वह नागरिकता से जुड़े मामलों के लिए कानून बनाए।

इसी आधार पर, संसद ने वर्ष 1955 में भारतीय नागरिकता अधिनियम पारित किया। यही कानून यह तय करता है कि कौन भारतीय नागरिक बन सकता है और किन शर्तों पर नागरिकता समाप्त हो सकती है। उदाहरण के लिए, जन्म, वंशानुसरण, नागरिकता के लिए आवेदन, या विवाह के आधार पर नागरिकता दी जा सकती है।

कई बार लोगों का मानना होता है कि राष्ट्रपति या कोई अधिकारी सीधे नागरिकता प्रदान करता है। लेकिन ऐसा नहीं है। नागरिकता एक कानूनी दर्जा है, जो संसद द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार मिलता है। कोई भी व्यक्ति जो भारतीय नागरिक बनना चाहता है, उसे इसी अधिनियम के तहत योग्यता पूरी करनी होती है।

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