दो नंबर का धंधा क्या है?
आज भी कई इलाकों में "दो नंबर का धंधा" कहने पर लोग सबसे पहले शराब के अवैध कारोबार की बात करते हैं। यह एक ऐसा नाम है जो अक्सर उन गुपचुप गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता है जो सीधे तौर पर कानून के दायरे से बाहर होती हैं। देसी शराब बनाना और बेचना इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है।
कई गांवों और छोटे-छोटे बस्तियों में आज भी ऐसी जगहें हैं जहां लोग घरों के पीछे छुपकर शराब बनाते हैं। कच्चे माल के रूप में अक्सर गन्ना, चावल या फलों का इस्तेमाल किया जाता है। यह शराब सस्ते दाम में बाजार में बिकती है और कई बार पुलिस की छापेमारी के बावजूद इसका कारोबार जारी रहता है।
यह धंधा न सिर्फ कानूनी नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है। गुणवत्ता के अभाव में ऐसी शराब से जानलेवा असर हो सकता है। फिर भी, आसान कमाई के चलते कई लोग इस रास्ते पर आ जाते हैं।
हालांकि सरकार ने कई जगहों पर इस पर रोक लगाने के लिए अभिय
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