सास-ससुर के पैर क्यों नहीं छूते?

भारतीय संस्कृति में गुरु, बुजुर्गों और माता-पिता के प्रति आदर गहरा है। पर जब बात सास-ससुर के पैर छूने की आती है, तो यह रिवाज इतना सामान्य नहीं है। कई लोग सोचते हैं कि शायद यह आदर का अभाव है, लेकिन ऐसा नहीं है।

दरअसल, ससुर और दामाद के रिश्ते में एक अलग तरह का सम्मान होता है। शास्त्रों के अनुसार, पत्नी का पिता पिता के समान होता है। लेकिन यहाँ आदर के तरीके अलग हैं। ससुर अक्सर अपने दामाद का आदर करते हैं, कभी-कभी तो उनके चरण भी छू लेते हैं। ऐसे में दामाद का ससुर के पैर छूना एक विनम्रता हो सकती है, लेकिन यह जरूरी नहीं।

अगर दिल से आदर है, तो पैर छूना या न छूना उसकी गहराई नहीं बदलता।

इसी तरह, पत्नी के पैर छूने की परंपरा भी नहीं है, लेकिन यह नारी की अवहेलना नहीं, बल्कि समानता का संकेत है। नारी सर्वत्र पूजनीय मानी गई है, और जहाँ आदर समानता के साथ हो, वहाँ झुकने की रस्में जरूरी नहीं।

असली बात तो

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