राजस्थान का अंतिम गांव – तनोट
तनोट, जैसलमेर से लगभग 120 किलोमीटर दूर, राजस्थान के खारे रेगिस्तान में एक छोटे से ओएसिस की तरह बसा है। यहां के घरों की झोपड़ियां और बालू के टीले ऐसे लगते हैं, जैसे कोई तस्वीर-पत्रिका के पन्ने से निकलकर सामने आए हों।
यहां का समय धीमा चलता है। जैसे-जैसे धूल भरी हवाएं बजरी के रास्तों पर उड़ती हैं, वैसे-वैसे यहां के लोग अपने दिन बिताते हैं – सादगी में, लेकिन गरिमा के साथ। यहां के लोग मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि यह गांव भारत-पाक सीमा के करीब है।
तनोट महादेव मंदिर भी यहां की एक खास पहचान है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1965 के युद्ध के दौरान यहां कई गोले गिरे, लेकिन मंदिर और आसपास के घर सुरक्षित रहे। तब से यहां की सुरक्षा भगवान की कृपा मानी जाती है।
राजनीतिक उथल-पुथल शहरों में चलती रहती है, लेकिन तनोट जैसे गांवों में उसका कोई असर नहीं दिखता। यहां की जिंदग
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