गुलाब राय पासवान: एक अनकही प्रेम गाथा

गुलाब राय पासवान अठारहवीं शताब्दी के उस झंकार में छुपी एक अनसुनी कहानी हैं — जहाँ प्रेम सामाजिक परंपराओं और जाति की दीवारों से टकराया। वे जोधपुर के महाराजा विजय सिंह की चहेती थीं, लेकिन उनकी जाति के कारण उन्हें कभी रानी का दर्जा नहीं मिला।

बाजीराव की मस्तानी की तरह, गुलाब राय भी एक ऐसी महिला थीं जिनका प्रेम इतिहास के पन्नों में अधूरा छोड़ गया। मस्तानी को मुस्लिम रहने के कारण मराठा परंपरा में जगह नहीं मिली, तो गुलाब राय को उनकी निम्न जाति के कारण राजपूत समाज में स्थान नहीं मिला।

फिर भी उनकी बातें, उनके प्रेम की गूंज आज तक थार की रेत में गूंजती है। कहते हैं, महाराजा विजय सिंह ने उनके लिए कई बार परंपरा को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन समाज की दृष्टि बदल नहीं सकी। गुलाब राय के बारे में कम लिखा गया, लेकिन जो बचा है, वह एक ऐसे दौर का साक्ष्य है जब प्रेम अक्सर दीवारों के आगे झुक गया।

आज, गुलाब राय

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