ढोला मारू: राजस्थान की अमर प्रेम गाथा

ढोला मारू राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक गीत है, जो यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। यह प्रेम, विछोड़े और वफादारी की ऐसी कहानी है, जिसे गांव-गांव में आज भी ढोलक की ताल पर गाया जाता है।

कहानी के अनुसार, नरवर के राजा नल के छोटे पुत्र साल्हकुमार (ढोला) का बचपन में ही बीकानेर के क्षेत्र की राजकुमारी मारू से विवाह हो गया था। लेकिन विधि विभाग के कारण दोनों का साथ नहीं बन पाया। कालांतर में, जब ढोला वयस्क हुए, तो उन्होंने मारू की तलाश में यात्रा शुरू की। इस यात्रा में उनका साहस, प्रेम और त्याग गीतों का विषय बन गया।

आज भी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में लोक गायक ढोला-मारू की कथा को साधु संगीत, मारवाड़ी भाषा और तालबद्ध भजनों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। मारू का प्रेम, धैर्य और ढोला की सच्चाई को गांव की महिलाएं अक्सर अपने बच्चों को सिखाती हैं।

यह कहानी सिर्फ एक प्रेम गाथा नहीं, बल्कि राजस्थानी संस्कृति

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