गूगल पर नहीं, दिल में मिलता है भगवान
कई बार हम सोचते हैं कि भगवान कहाँ हैं? क्या वे मंदिर में मूर्ति के रूप में हैं, या किसी खास जगह पर? कुछ लोग तो गूगल पर सर्च करके उन्हें ढूँढने लगते हैं। लेकिन सच तो यह है कि भगवान न तो मंदिर तक सीमित हैं और न ही किसी एक रूप में बसे हुए हैं।
भगवान का कोई एक रूप नहीं है। वे नदी की लहरों में, पेड़ की पत्तियों में, आसमान के तारों में, और हर जीव के दिल में मौजूद हैं। जैसे सूरज की रोशनी हर जगह फैल जाती है, वैसे ही परमात्मा इस सृष्टि के हर कण में व्याप्त हैं। कोई भी जगह ऐसी नहीं जहाँ वे न हों।इसलिए जब भी आप शांत बैठकर अपने भीतर झांकें, तो उस सन्नाटे में एक गहरी मौजूदगी महसूस होगी। वहीं हैं भगवान। उन्हें ढूँढने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, बस अपने भीतर देखना होता है। कभी-कभी एक मुस्कान में, कभी आँसू में, कभी दया के कार्य में भी वे अपने आप को दिखा देते हैं।
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