मरणोपरांत क्या होता है? एक शांत यात्रा की ओर
मरने वाला व्यक्ति अक्सर ऐसी दुनिया में जाने लगता है, जहाँ शब्दों की जगह भावनाएँ और दृश्य बोलते हैं। कई बार ऐसा देखा गया है कि मृत्यु के करीब आते-आते व्यक्ति को अपने प्रियजनों के दर्शन होने लगते हैं — जो शायद इस दुनिया से चले गए हों। ये दृश्य या आवाज़ें कोई मतिभ्रम नहीं, बल्कि उस यात्रा का हिस्सा लगते हैं, जिसकी तैयारी आत्मा कर रही होती है।
हालाँकि, यह अनुभव दर्द या डर से भरपूर नहीं होता। बल्कि, कई लोग इन्हें शांति और स्वीकृति का अहसास मानते हैं। ऐसे मरीज अक्सर उन लोगों से बात करते हैं जिन्हें दूसरे नहीं देख पाते — किसी खाली कोने में मुस्कुराते चेहरे या आवाज़ों को पहचानते हुए। ये कोई भ्रम नहीं, बल्कि एक अलग आयाम के द्वार खुलने का संकेत हो सकते हैं।
इन अंतिम पलों में, व्यक्ति इस धरती से धीरे-धीरे अलग होने लगता है। उसका ध्यान “दूसरी दुनिया” की ओर मुड़ने लगता है। परिवार वाले
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