महादेव को क्यों कहा जाता है देवों के देव?

सनातन परंपरा और हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान शिव को महादेव कहकर पुकारा जाता है, जिसका अर्थ है 'देवों के देव'। वेदों और पुराणों के अनुसार, सृष्टि के संचालन और संतुलन के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) को त्रिदेव माना गया है। इनमें से भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है, जो समय चक्र पूरा होने पर कलयुग के अंत में इस सृष्टि का संहार करेंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव जी ही महाशक्तिशाली हैं। वे अजन्मा, अनादि और अनंत हैं, जिनका न कोई आरंभ है और न ही कोई अंत। संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति, स्थिति और लय उन्हीं की इच्छा और इशारे मात्र से होती है। जब देवताओं पर भी कोई बड़ा संकट आता है, तो वे भगवान शिव की शरण में जाते हैं। समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को पीकर ब्रह्मांड की रक्षा करने के कारण भी उन्हें सबसे ऊंचा स्थान मिला।

भोलेनाथ जहां एक ओर अत्यंत भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं, वहीं दूसरी ओर वे परम शक्ति के पुंज हैं। उनकी इसी असीम महिमा, सर्वोच्च शक्ति और निश्छल दयालुता के कारण उन्हें सभी देवताओं में सबसे ऊपर माना गया है और इसी श्रद्धा भाव से भक्त उन्हें 'महादेव' कहते हैं।

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