शीतला माता का मंत्र और उसकी महिमा

शीतला माता हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवी हैं, जिनकी उपासना विशेष रूप से शीतला अष्टमी के दिन की जाती है. मान्यता है कि माँ शीतला चेचक, खसरा और अन्य बीमारियों से बचाव करती हैं. उनकी पूजा से स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः यह उनका मुख्य मंत्र है, जो स्कंद पुराण में उल्लिखित है. कहा जाता है कि इस मंत्र का नियमित जाप मनुष्य को न केवल शारीरिक बीमारियों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि समाज में मान-सम्मान और गरिमा भी प्रदान करता है. लोग अपने घरों में शीतला माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करके नियमित पूजा करते हैं.

विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में शीतला माता की भक्ति काफी प्रचलित है. लोग मनोकामना पूर्ति के लिए इस मंत्र का जाप करते हैं और आठ सौ (800) बार जाप करने का व्रत भी रखते हैं. पूजा में आमतौर पर ठंडे पदार्थ, खीर और नारियल अर्पित किए जाते हैं.

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