भिखारी बनने की मजबूरी
भिखारी बनना कोई स्वैच्छिक फैसला नहीं, बल्कि अक्सर जीवन की कठिन परिस्थितियों का नतीजा होता है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि भीख मांगने से ज्यादा पैसा मिल जाता है, लेकिन सच यह है कि अधिकतर भिखारी समाज की नजरों से ओझल हो चुके लोग हैं — जिन्हें न तो रोजगार मिला, न ही सम्मानजनक जीवन जीने का मौका।
कई ऐसे लोग हैं जो पढ़-लिखकर भी अपनी डिग्री के हिसाब से नौकरी न मिलने के कारण भीख मांगने को मजबूर हो जाते हैं। शहरों में बेरोजगारी, घर न होना, परिवार का सहारा न होना और शारीरिक विकलांगता जैसे कारण इन लोगों को सड़कों पर धकेल देते हैं। कुछ मामलों में तो भीख से वास्तव में नौकरी से ज्यादा आय होने के कारण लोगों को यह रास्ता सही लगने लगता है।
लेकिन यह भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि ज्यादातर भिखारी इस रास्ते को चुनना नहीं चाहते। उनके पास अक्सर चुनने का विकल्प ही नहीं होता। सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक न पहुंचना, श
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