संजय और कस्तूरी का प्यार
प्यार कभी-कभी ऐसे लम्हों में जन्म लेता है, जब दिल की धड़कनें एक हो जाती हैं। संजय और कस्तूरी का प्यार भी ऐसा ही था। वो नजदीकियाँ, जो धीरे-धीरे बढ़ीं, अब उनके रिश्ते की आत्मा बन चुकी थीं।
कस्तूरी के मासूम चेहरे ने संजय के दिल में ऐसी जगह बना ली थी, जहाँ किसी और का नाम तक नहीं था। वो उसकी हर छोटी-छोटी बात को महत्व देने लगा था। जब वो बात करती, तो संजय की नजरें उसके होंठों से चिपक जातीं। उसके हाव-भाव, उसकी मुस्कान, हर इशारा — सब कुछ संजय के लिए प्यार का अर्थ बन गया था।
उनका प्यार सिर्फ भावनाओं तक नहीं रुका। वो एक-दूसरे के साथ साझा क्षणों में खो जाते। ऐसे पल, जब दिल बोलता है, शब्द नहीं — वो उनके प्यार की भाषा बन गए। कस्तूरी की सादगी ने संजय के दिल पर ऐसा राज किया कि वो किसी भी बात में उससे ना कह नहीं कह पाता।
पति-पत्नी के बीच ऐसा प्यार होता है, जो न सिर्फ रिश्ते को जोड़ता है, बल्कि उसे ह
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