कुण्डलिनी जागरण और अदृश्य शक्तियाँ

बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि मायावी शक्ति या अतिंद्रिय क्षमताएँ कैसे प्राप्त की जा सकती हैं। प्राचीन आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी शक्तियाँ प्राप्त करने का मूल मार्ग है – कुण्डलिनी जागरण। यह कोई जादू नहीं, बल्कि आंतरिक ऊर्जा की एक गहन प्रक्रिया है।

कुण्डलिनी शक्ति मनुष्य की मूलाधार चक्र में सोई हुई मानी जाती है। जब व्यक्ति लंबे समय तक ध्यान, तपस्या और योग के माध्यम से आत्म-जागरण की ओर बढ़ता है, तो यह शक्ति जागृत होती है। इस जागरण के बाद शरीर के सात चक्रों में ऊर्जा का प्रवाह बदलने लगता है।

जैसे-जैसे कुण्डलिनी ऊपर की ओर बढ़ती है, मनुष्य की पारंपरिक पाँच इंद्रियों के अलावा छठी इंद्रिय सक्रिय हो जाती है। यही वह अवस्था है जब व्यक्ति अदृश्य को देखने, भावी घटनाओं का आभास पाने या दूसरों के विचारों को महसूस करने लगता है।

हालाँकि, यह प्रक्रिया सरल नहीं है। इसमें निष्ठा, साधना औ

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