गायब होने की सिद्धि: योग का अद्भुत रहस्य
क्या कभी आपने सोचा है कि कोई इंसान वास्तव में गायब कैसे हो सकता है? हम अक्सर ऐसी बातें सुनते हैं तो मान लेते हैं कि यह कोई कहानी या कल्पना है। लेकिन प्राचीन भारतीय ज्ञान में इसका उल्लेख गंभीरता से किया गया है। महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्र में अष्टांग योग के माध्यम से अदृश्य होने की सिद्धि का ज़िक्र किया है।
यह सच नहीं कि कोई जादू से गायब हो जाता है। बल्कि, योग के माध्यम से मन, शरीर और चेतना पर गहरा नियंत्रण स्थापित करने पर ऐसी शक्तियाँ प्रकट होती हैं। कायागत रूप पर संयम—यानी शरीर के अस्तित्व को इतना सूक्ष्म कर देना कि वह इंद्रियों की पहुँच से बाहर हो जाए।
जब योगी गहन ध्यान में डूबता है, तो वह इतना अंतर्मुखी हो जाता है कि उसका शारीरिक रूप सामान्य इंद्रियों द्वारा अनुभव नहीं किया जा सकता। न तो उसकी आवाज़ सुनाई देती है, न छाया दिखाई देती है, न ही उसकी गंध या रूप का बोध होता है। वह सचमुच
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