भगवान कौन है?

भगवान का अर्थ है – सर्वोच्च शक्ति, वह सत्ता जो सम्पूर्ण सृष्टि के मूल में है। यह शब्द संस्कृत के 'भगवत' से लिया गया है। जिसने पांचों इंद्रियों – आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा – पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया हो, उसे 'भगवान' कहा जाता है।

भगवान केवल एक नाम या रूप नहीं है, बल्कि वह वह सार्वभौमिक चेतना है जो सबमें व्याप्त है। वह पंचतत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – पर भी पूर्ण अधिकार रखता है। इसीलिए जब कोई संत, ऋषि या योगी इन सभी तत्वों और इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेता है, तो उसे भी 'भगवान' कहा जा सकता है।

ध्यान रहे, 'भगवान' के स्त्रीलिंग रूप को भगवती कहा जाता है, जो शक्ति, ज्ञान और दिव्य माँ का प्रतीक है। गीता, उपनिषद और पुराणों में भगवान को निराकार भी माना गया है और साकार रूपों में भी पूजा जाता है – जैसे विष्णु, शिव, दुर्गा या राम।

अंततः, भगवान को समझना अर्थ है – आत्मज्ञान की ओर बढ़ना। क्य

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